STORY OF THE DAY – भिखारी और सौदागर

STORY OF THE DAY – भिखारी और सौदागर

एक भिखारी को बाजार में एक चमड़े का बटुआ पड़ा मिला तो उसने जब बटुए को खोल कर देखा तो उसमे सोने की सौ अशर्फियाँ थी इतने में उसने देखा कि भीड़ में एक आदमी चिल्ला रहा है कि मेरा बटुआ खो गया है और जो भी मुझे लाकर देगा मैं उसे इनाम दूंगा | ऐसा कहते हुए जब भिखारी ने सुना तो भिखारी एक ईमानदार व्यक्ति था और सोचा कि किसी को परेशान होते देखने से अच्छा है मैं उसे बटुआ लौटा देता हूँ | ऐसा सोचकर भिखारी उस सौदागर के पास गया और उसे बटुआ सौंपते हुए बोला कि ये मुझे यंही से थोड़ी दूर बाजार में पड़ा हुआ मिला है | अब क्या आप मुझे इनाम देंगे |

सौदागर ने बटुए की अशर्फियाँ गिनते हुए बोला कि इसमें तो दो सौ अशर्फियाँ थी बाकि कंहा है तुमने आधी चुरा ली और अब इनाम मांगते हो | दफा हो जाओ यंहा से नहीं तो मैं सिपाहियों को बुला लूँगा | इतनी ईमानदारी दिखने के बाद भी व्यर्थ का इलज़ाम भिखारी से सहन नहीं हुआ उसने बोला मैंने कुछ भी नहीं चुराया है और इसके लिए मैं तुम्हारे साथ अदालत चलने को भी तेयार हूँ | अदालत में काजी ने दोनों की बाते बड़े इत्मिनान से सुनी और फिर बोला कि मुझे तुम दोनों पर यकीन है इसलिए मैं इन्साफ करूँगा |

सौदागर तुम कहते हो बटुए में दो सौ अशर्फियाँ थी जबकि भिखारी को केवल सौ अशर्फियाँ मिली इसलिए बटुआ तुम्हारा नहीं है इसलिए आधी रकम सरकारी खजाने में जमा करवा दी जाये और आधी इस भिखारी को इनाम में दे दिए जांए क्योंकि इसने अपना कर्तव्य निभाया है | और चूँकि इस बटुवे का कोई दावेदार भी नहीं है इसलिए यही करना उचित भी है |

बेईमान सौदागर हाथ मलता रह गया और चाहकर भी अब वह बटुए को अपना नहीं कह सकता था क्योंकि ऐसा करने पर उसे कड़ी सज़ा दी जा सकती थी |

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