STORY OF THE DAY – माँ एक फ़रिश्ता (Mother is an Angel)

STORY OF THE DAY – माँ एक फ़रिश्ता (Mother is an Angel)

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एक समय की बात है एक बच्चे का जन्म होने वाला था | जन्म से कुछ क्षण पहले ही उसने भगवान से पूछा की मैं तो इतना छोटा हूँ भला मैं धरती पर कैसे रह पाउँगा | कृपया मुझे अपने पास ही रहने दीजिये मैं कंही नहीं जाऊंगा | भगवान् बोले मेरे पास बहुत से फ़रिश्ते है उनमे से किसी एक को मेने तुम्हारे लिए चुन लिया है और वह तुम्हारा बहुत अच्छे से ख्याल रखेगा इसलिए तुम चिंता मत करो |

बच्चे ने पूछा यंहा स्वर्ग में मैं कुछ नहीं करता बस गाता और मुस्कुराता रहता हूँ ,मेरे खुश रहने के लिए इतना बहुत है इस पर भगवान् ने कहा कि तुम्हारा फ़रिश्ता तुम्हारे लिए गायेगा भी और हर रोज़ तुम्हारे लिए मुस्कुराएगा भी |तुम उसका प्रेम महसूस करोगे और खुश रहोगे |

बच्चे ने कहा जब वंहा लोग मुझसे बाते करेंगे तो मैं समझूंगा कैसे ? मुझे तो उनकी भाषा भी नहीं आती इस पर भगवान् ने कहा तुम्हारा फ़रिश्ता तुमसे बड़ी ही मधुर और प्यारे शब्दों में बात करेगा ऐसे शब्द जो तुमने यंहा भी नहीं सुने होंगे बड़े धर्य और सावधानी से तुम्हारा फ़रिश्ता तुम्हे बोलना भी सिखाएगा |

बच्चे ने पूछा जब मुझसे आपसे बात करनी हो तो मैं कैसे करूंगा ?भगवान् ने कहा तुम्हारा फ़रिश्ता तुम्हे हाथ जोड़कर प्रार्थना करना भी सिखाएगा और इस तरह तुम मुझसे बात कर पाओगे |

बच्चे ने फिर पूछा कि मैंने सुना है धरती पर बुरे लोग भी होते है उनसे मुझे कौन बचाएगा तो इस पर भगवान् ने कहा तुम्हारा फ़रिश्ता ही तुम्हारी रक्षा करेगा भले ही उसे अपनी जान क्यों न देनी पड़ जाएँ लेकिन मैं हमेशा दुखी रहूँगा क्योंकि मैं आपको नहीं देखा पाउँगा | इस पर भगवान् ने कहा ऐसा कुछ नहीं होगा तुम्हारा फ़रिश्ता तुमसे मेरे बारे में बात करेगा और तुम मुझे वापिस कैसे पा सकते हो ये भी तुम्हे सिखाएगा |

उस वक़्त स्वर्ग में असीम शांति थी लेकिन पृथ्वी पर किसी के कराहने की आवाज आई बच्चा समझ गया कि अब उसे जाना है रो उसने रोते रोते भगवान् से पूछा कि चलिए भगवान् अब मुझे उस फ़रिश्ते का नाम तो बता दीजिये मैं किस नाम से जाकर पुकारूँगा |

भगवान् ने कहा कि फरिश्ते के नाम का कोई महत्व नहीं है लेकिन बस इतना समझ लो तुम उसे माँ कहके पुकारोगे |

STORY OF THE DAY – माँ एक फ़रिश्ता (Mother is an Angel)

STORY OF THE DAY – माँ एक फ़रिश्ता (Mother is an Angel)

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एक समय की बात है एक बच्चे का जन्म होने वाला था | जन्म से कुछ क्षण पहले ही उसने भगवान से पूछा की मैं तो इतना छोटा हूँ भला मैं धरती पर कैसे रह पाउँगा | कृपया मुझे अपने पास ही रहने दीजिये मैं कंही नहीं जाऊंगा | भगवान् बोले मेरे पास बहुत से फ़रिश्ते है उनमे से किसी एक को मेने तुम्हारे लिए चुन लिया है और वह तुम्हारा बहुत अच्छे से ख्याल रखेगा इसलिए तुम चिंता मत करो |

बच्चे ने पूछा यंहा स्वर्ग में मैं कुछ नहीं करता बस गाता और मुस्कुराता रहता हूँ ,मेरे खुश रहने के लिए इतना बहुत है इस पर भगवान् ने कहा कि तुम्हारा फ़रिश्ता तुम्हारे लिए गायेगा भी और हर रोज़ तुम्हारे लिए मुस्कुराएगा भी |तुम उसका प्रेम महसूस करोगे और खुश रहोगे |

बच्चे ने कहा जब वंहा लोग मुझसे बाते करेंगे तो मैं समझूंगा कैसे ? मुझे तो उनकी भाषा भी नहीं आती इस पर भगवान् ने कहा तुम्हारा फ़रिश्ता तुमसे बड़ी ही मधुर और प्यारे शब्दों में बात करेगा ऐसे शब्द जो तुमने यंहा भी नहीं सुने होंगे बड़े धर्य और सावधानी से तुम्हारा फ़रिश्ता तुम्हे बोलना भी सिखाएगा |

बच्चे ने पूछा जब मुझसे आपसे बात करनी हो तो मैं कैसे करूंगा ?भगवान् ने कहा तुम्हारा फ़रिश्ता तुम्हे हाथ जोड़कर प्रार्थना करना भी सिखाएगा और इस तरह तुम मुझसे बात कर पाओगे |

बच्चे ने फिर पूछा कि मैंने सुना है धरती पर बुरे लोग भी होते है उनसे मुझे कौन बचाएगा तो इस पर भगवान् ने कहा तुम्हारा फ़रिश्ता ही तुम्हारी रक्षा करेगा भले ही उसे अपनी जान क्यों न देनी पड़ जाएँ लेकिन मैं हमेशा दुखी रहूँगा क्योंकि मैं आपको नहीं देखा पाउँगा | इस पर भगवान् ने कहा ऐसा कुछ नहीं होगा तुम्हारा फ़रिश्ता तुमसे मेरे बारे में बात करेगा और तुम मुझे वापिस कैसे पा सकते हो ये भी तुम्हे सिखाएगा |

उस वक़्त स्वर्ग में असीम शांति थी लेकिन पृथ्वी पर किसी के कराहने की आवाज आई बच्चा समझ गया कि अब उसे जाना है रो उसने रोते रोते भगवान् से पूछा कि चलिए भगवान् अब मुझे उस फ़रिश्ते का नाम तो बता दीजिये मैं किस नाम से जाकर पुकारूँगा |

भगवान् ने कहा कि फरिश्ते के नाम का कोई महत्व नहीं है लेकिन बस इतना समझ लो तुम उसे माँ कहके पुकारोगे |

STORY OF THE DAY – कुएं वाला शेर

STORY OF THE DAY – कुएं वाला शेर

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जंगल में एक शेर रहता था और शेर बहुत गुस्से वाला था सभी जानवर उस से डरते थे ।

वह सभी जानवरो को बहुत परेशान करता था और आये दिन शिकार करने में उसकी मनमानी से सभी जानवर तंग आ चुके थे । एक दिन सभी जानवरो ने जंगल में एक सम्मेलन रखा क्योकि जानवरों ने सोचा शेर की प्रतिदिन की परेशानी से अच्छा है हम लोग शेर के लिए प्रतिदिन भोजन ला देते है इस से वो किसी को परेशान भी नहीं करेगा और खुश भी रहेगा ।

सभी जानवरों ने एक साथ शेर के सामने अपनी बात रखी । शेर बहुत खुश हुआ और इसके बाद शेर ने शिकार करना भी बंद कर दिया । एक दिन शेर को बहुत तेज भूख लग रही थी और एक चतुर खरगोश शेर का खाना लाते लाते रस्ते में रुक गया । फिर थोड़ी देर बाद खरगोश शेर के सामने गया तो शेर दहाड़ते गए बोला ” इतनी देर से क्यों आये और मेरा खाना कंहा है ?” तो खरगोश ने जवाब दिया कि ” शेर जी रस्ते में मुझे दूसरे शेर ने रोक लिया और आपका खाना भी खा गया ” तो शेर बोला इस जंगल का राजा तो मैं हूँ फिर दूसरा शेर कहा से आ गया तो खरगोश शेर को एक कुँए के पास ले गया और कहा कि ” वो दूसरा शेर इसी के अंदर रहता है ” तो शेर ने झुक कर कुँए में देखा तो अपनी परछाई देखी और जोर से दहाड़ा तो उसे लगा कि कुँए के अंदर वाला शेयर भी उसे ललकार रहा है और यह देखकर गुस्से में आकर शेर ने कुँए के अदंर छलांग लगा दी । इसी प्रकार जानवरों को शेर से मुक्ति मिली ।

शिक्षा : चतुरता हमारे बहुत से मुश्किलें आसान कर देती है बशर्ते हम एकता रखे

STORY OF THE DAY – बिना अकल के नक़ल

STORY OF THE DAY – बिना अकल के नक़ल

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एक बनिया था बिलकुल भोला और वह किसी गाँव के बीच मैं अपनी छोटी सी दुकान चलाता था जो उसे बनता उसी से उसका घर चलता था एक रात वो देरी से अपनी दुकान को बंद करके घर जा रहा था | तो रस्ते में उसे कुछ चोर मिले | बनिए ने उन से पूछा की भाई लोगो इतनी रात में कन्हा जा रहे हो |

इस पर चोरो ने कहा ‘भाई हम सौदागर है माल खरीदने जा रहे है ‘ बनिए ने कहा अब तो रात का एक पहर हो गया है अब कौनसा माल खरीदने जा रहे हो | अच्छा छोड़ो ये बताओ माल नकद खरीदोगे ये उधार इस पर चोरो ने कहा भाई ‘पैसे तो देने ही नहीं होते है |’ बनिया बोला ऐसा कौनसा पेशा है जिसमे बिना पेसे माल खरीदा जाता है | कुछ सोचकर बनिया बोला अच्छा भाई आप मुझे भी अपने साथ लेलो इस पर चोर बोले ‘चलिए ! आपका भी फायदा हो जायेगा ‘ इस पर बनिए ने कहा मुझे इस पेशे की कोई जानकारी नहीं है आप मुझे बता तो दीजिये ये धंधा किया केसे जाता है | इस पर चोर बोले एक कागज पर लिख लो हम बताते है न आपको |

बनिए ने कागज पर लिखना शुरू किया | चोर बोले लिखो ‘किसी के घर के पिछवाड़े ‘ बनिया ने लिखा चोर कहने लगे अब लिखो ‘चुपचाप सेंध लगाना ‘ बनिया कहने लगा लिख दिया | चोर बोले ‘दबें पांव घर में घुसना जो भी हो सब इकठ्ठा कर लेना ‘ बनिये ने पूछा आगे तो चोर बोले ‘न मकान मालिक से पूछना और न ही पेसे देना सब समेट कर अपने घर ले आना’| बनिए ने सब लिख लिया और कागज को अपनी जेब में डाल लिया |

सब चोरी करने निकले चोर एक घर में चोरी करने घुसे और बनिया दुसरे घर में | बनिया दबे पांव घर पे पिछवाडे से अंदर गया और सब सो रहे थे इसलिए अंदर तक चला गया और जाकर बड़ी बेफिक्री से माल बटोरने लगा इतने में उसके हाथ से एक बर्तन गिर गया और सब घरवाले जाग गये और घर में चोर घुसा देखकर उसे पीटने लगे | बनिया जोर जोर से चिल्लाने लगा कि” ऐसा तो इसमें लिखा नहीं है यंहा तो सब उल्टा हो रहा है |” सब उसे मारना छोड़ पूछने लगे “क्या बकवास कर रहा है ” इस पर बनिये ने जेब से कागज निकालकर दिखाया तो सब को बात समझ आ गयी और उसे धक्के देकर घर से बाहर किया |

STORY OF THE DAY – सुखी कौन (Who are happy)

STORY OF THE DAY – सुखी कौन (Who are happy)

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एक कौवा था जो जंगल में रहता था और अपने जीवन में बहुत संतुष्ट था लेकिन जिस दिन से उसने हंस को देखा तो थोडा व्याकुल हो गया और सोचने लग हंस मुझसे कई गुना अधिक सुंदर है और सोचने लगा हंस दुनिया का सबसे सुखी पक्षी होगा |

इस पर काफी दिन सोचने विचारने के बाद उसने एक दिन हंस से हिम्मत करके पुछा कि भाई तुम तो बड़े सुखी और खुश हौंगे क्योंकि तुम कितना सफ़ेद और सुन्दर हो इस पर हंस ने कहा कुछ दिन तो मुझे ऐसे ही लगता था लेकिन अब ऐसा नहीं लगता है क्योंकि जिस दिन से मेने तोते को देखा है तो मेरी गलतफहमी दूर हो गयी है तोता अपने शरीर पर दो रंग लिए है गर्दन के पास लाल रंग की सजावट है जबकि वो गहरे हरे रंग का है तो मेरा भी मन होता है काश मैं भी उतना खूबसूरत होता | और वह कितना मीठा बोलता है तब से मुझे लगता है तोता ही सबसे खूबसूरत है इसलिए वो सबसे सुखी भी है |

यह सुनकर कौवा तोते के पास गया और उस से भी यही सवाल किया इस पर तोता बोला मै भी पहले यही सोचता था लेकिन जब से मेने मोर को देखा है तो लगता है मुझमे तो दो ही रंग है लेकिन मोर में तो कई रंग है और वह खूबसूरत भी मुझसे अधिक है इसलिए मुझे लगता है मोर ही सबसे अधिक सुखी पक्षी है |

यह सुनकर कौवा अब प्राणी संग्रहालय देखने गया उसने देखा वंहा मोर एक पिंजरे में बंद है और बहुत सारे लोग है जो उसे देखने रोजाना आते है | जब सब लोग चले गये तो कौवे ने मोर से कहा मित्र तुम तो अति सुन्दर हो इसलिए तुम सबसे सुखी और बड़े किस्मत वाले भी हो |तुम्हे देखने के लिए रोज हजारों लोग आते है |

इस पर मोर ने कहा मैं भी पहले यही सोचता था कि पूरी पृथ्वी पर मैं ही सबसे अधिक सुन्दर हूँ लेकिन अब ऐसा नहीं है वास्विकता ये है कि मैं अपनी सुन्दरता के कारण ही यंहा पिंजरे में बंद हूँ असल में किस्मत वाले तो तुम हो क्योंकि पूरी धरती पर तुम एकमात्र ऐसे पक्षी हो जिसे पिंजरे में कैद नहीं किया जाता इसलिए मेरी इच्छा होती है कि काश मैं कौवा होता तो अपनी मन पसंद जगह पर उड़ता हुआ घूमता इसलिए वास्तव में तुम सबसे सुखी पक्षी हो |

STORY OF THE DAY – दानव और चतुर बकरे

STORY OF THE DAY – दानव और चतुर बकरे

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एक जंगल के किनारे एक नदी बहती थी और नदी के किनारे ही एक गाँव भी बसा हुआ था | नदी के ऊपर एक पुल भी था और पुल के नीचे रहता था एक दानव | जंगल में तीन बकरे चर रहे थे तो उनमे से एक बकरे ने कहा कि नदी के किनारे जो गाँव बसा है उसके खेतों में खूब हरा चारा है मिल जाएँ तो मज़ा आ जाये क्योंकि उनकी महक जो है वो हवा के साथ यंहा तक आती है |

सबसे बड़े बकरे ने सबसे छोटे वाले से कहा तू जा और पुल पार करके और खा आ | हम आते है | इस पर छोटा बकरा वंहा से चल पड़ा जैसे ही वो पुल पर पहुंचा खूंखार बड़े दांतों वाला दानव वंहा आ गया तो छोटे बकरे ने डरते हुए उस से कहा देखो मैं तो इतना छोटा हूँ कि मुझे खाने से तुम्हारी भूख नहीं मिटेगी मेरे दो दोस्त है जो इसी पथ पर आ रहे है ऐसा करना उन्हें कहा लेना | दानव बड़े बकरों का नाम सुनकर लालच में आ गया | दानव ने कहा तू जा मैं उन्हें देखता हूँ |

थोड़ी देर बाद मंझला बकरा भी उसी रस्ते पुल पर से गुजरा इस पर दानव फिर आ गया तो दानव ने उसे डराते हुए कहा कि मुझे भूख लगी है और मैं तुमको खाऊंगा | इस पर मंझले बकरे ने कहा मुझे जाने दो दानव मैं अभी बहुत छोटा हूँ तुम्हारा मुझसे पेट नहीं भरेगा मेरा एक दोस्त जो मुझसे कंही अधिक बड़ा है वो अभी इसी रस्ते आने वाला है तुम उसे खा लेना तो दानव फिर लालच में आ गया उसने मंझले बकरे को जाने दिया |

जब सबसे बड़ा बकरा जो वाकई में बहुत शक्तिशाली और बलवान था जिसके पुल पर से गुजरने से पुल भी हिल रहा था वो उसी रस्ते से गुजरा तो दानव आ गया और उसे डराने लगा इस पर बड़े बकरे ने हिम्मत दिखाते हुए हुंकार भरी और जोर से भाग कर अपने तीखे बड़े सींघो से उसके पेट पर वार किया तो दानव नदी में जा गिरा और मर गया |

इस प्रकार तीनो बकरों ने बुद्धिमता दिखाते हुए अपनी जान बचायी और गाँव के खेतों में जाकर खूब फल सब्जियां और अपना मनपसंद भोजन करने लगा |

STORY OF THE DAY – रेत का घर (SandHouse)

STORY OF THE DAY – रेत का घर (SandHouse)

Watch here: https://www.youtube.com/watch?v=MP-9lRUJFKk

एक गाँव में नदी के किनारे कुछ बच्चे खेलते हुए रेत के घर बना रहे थे |किसी का पैर किसी के घर को लग जाता और वो बिखर जाता इस बात पर झगड़ा हो जाता | थोड़ी बहुत बचकानी उम्र वाली मारपीट भी हो जाती | फिर वह बदले की भावना से सामने वाले के घर के ऊपर बैठ जाता और उसे मिटा देता और फिर से अपना घर बनाने में तल्लीन हो जाया करता | यही बच्चो का काम था |

महात्मा बुध चुपचाप एक और खड़े ये सारा तमाशा अपने शिष्यों के साथ देख रहे थे | बच्चे अपने आप में ही मशगूल थे तो किसी ने उनकी तरफ ध्यान नहीं दिया | इतने में एक स्त्री आकर बच्चो को कहती है साँझ हो गयी है तुम सब की माएं तुम्हारा रास्ता देख रही है | बच्चो ने चौंकते हुए देखा दिन बीत गया है साँझ हो गयी है और अँधेरा होने को है |

इसके बाद वो अपने ही बनाये घरों पर उछले कूदे सब मटियामेट कर दिया और किसी ने नहीं देखा कौन किसका घर तोड़ रहा है | सब बच्चे भागते हुए अपने घरों की और चल दिए |

महात्मा बुद्ध ने अपने शिष्यों से कहा तुम मानव जीवन की कल्पना इन बच्चो की इस क्रीडा से कर सकते हो क्योंकि तुम्हारे बनाये शहर ,राजधानियां सब ऐसे ही रह जाती है और तुम्हे एक दिन यह सब छोड़कर जाना ही होती है तुम यंहा जिन्दगी की भागदौड में सब भूल जाते हो और खुद से कभी मिल ही नहीं पाते जबकि जाना तो सबका तय ही है इसलिए कभी भी अधिक लम्बा सोच कर समय बर्बाद नहीं करना चाहिए वर्तमान में जीना चाहिए |

STORY OF THE DAY – अहंकार की मूर्ति

STORY OF THE DAY – अहंकार की मूर्ति

एक मूर्तिकार था जो बहुत अच्छी मूर्तियाँ बनाता था और उसकी मूर्तियाँ भी बहुत अच्छे दामों पर बिकती थी | समय के साथ उसका बेटा भी बड़ा हो गया तो उसने वही हुनर अपने बेटे को भी सिखा दिया और दोनों बाप बेटे मूर्तियाँ बनाने लगे और शाम को बाजार में जाकर उनको बेच आते इस तरह उनका गुजरा चलता | थोड़े दिनों में ही बेटे की मेहनत और लगन रंग लायी और उसके बाद उसकी मूर्तियाँ अपने पिता की मूर्तियों से अधिक दामों पर बिकने लगी |

एक दिन मूर्तिकार का बेटा रोज की तरह मूर्तियाँ बना रहा था तो उसके पिता ने जाकर अपने बेटे को मूर्ति के अंदर रह जाने वाली कमियों को बताया तो बार बार कमियां बताने पर मूर्तिकार का बेटा खीज गया और क्रोध में आकर कहने लगा कि पिताजी अगर मेरी मूर्तियों में इतनी ही कमी होती तो आपसे अधिक दाम पर कभी नहीं बिकती |

मूर्तिकार ने कुछ नहीं कहा और अंदर जाकर सो गया तो थोड़े देर बाद उसके बेटे को अहसास हुआ कि उसे अपने पिता से ऐसे बात नहीं करनी चाहिए थी इस पर उसका बेटा अंदर गया और अपने पिता के पेरो के पास बैठकर उस से माफ़ी मांगी इस पर मूर्तिकार ने बड़े प्यार से समझाया कि बेटा जब मैं तुम्हारी उम्र का था तो मुझे भी अहंकार हो गया था कि मैं सबसे अच्छी मूर्तियाँ बनाता हूँ क्योंकि मेरे पिता की एक मूर्ति पांच रूपये में बिकती थी जबकि मेरी वाली पांच सौ में और इसके बाद देखो मैं कभी इस से अच्छे दाम पर अपनी मूर्तियाँ नहीं बेच पाया | क्योंकि अहंकार के आ जाने पर हम सीखना बंद कर देते है और मैं नहीं चाहता कि जो नुकसान मेरा हुआ वो तुम्हारा भी हो इसलिए मेने तुमसे ये कह दिया और फिर इन्सान तो जीवन भर सीखता ही रहता है फिर घमंड किस बात का |

मूर्तिकार के बेटे को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने भविष्य के लिए अपने पिता को अपनी मूर्तियों में कमियां बताने का आग्रह किया |

STORY OF THE DAY – चरित्र का सम्मान

STORY OF THE DAY – चरित्र का सम्मान

एक बार एक राजा के पुरोहित के मन में एक सवाल आ गया कि राजा और बाकि सब लोग मुझे इतने आदर भाव से देखते है वो सम्मान मेरे ज्ञान का है या सदाचार का | कई दिनों तक यह सवाल पुरोहित को परेशान करता रहा आखिर एक दिन उसे इस सवाल के जवाब को ढूँढने की तरकीब मिल गयी | उसने राजकोष से एक सिक्का उठा लिया तो मंत्री ने ऐसा करते उसे देख लिया और सोचा कि पुरोहित ने अगर ये किया है तो जरुर कोई न कोई विशेष प्रयोजन होगा | दुसरे दिन भी यही घटना दोहराई गयी मंत्री फिर भी कुछ नहीं बोला |

तीसरे दिन पुरोहित ने राजकोष से मुट्ठीभर सिक्के उठा लिए तो मंत्री ने जाकर ये बात राजा से कही | अगले दिन जब दरबार लगा तो राजा ने पुरोहित से पूछा कि क्या मंत्री सही कह रहा है तो इस पर पुरोहित ने कहा कि -हाँ मंत्री सही कह रहे है | तो राजा ने पुरोहित को दंड सुना दिया |

इस पर पुरोहित ने बोला कि की राजन मैं चोर नहीं हूँ अपितु मैंने सिक्के इसलिए उठाये है क्योंकि मेरे मन एक विचार आया था कि ये जो आप सब लोग मुझे आदरभाव से देखते है वो मेरे ज्ञान की वजह से है या सदाचार की वजह से | यह परीक्षा हो गयी सम्मान अगर ज्ञान का होता तो आज मैं कटघरे में नहीं होता क्योंकि ज्ञान मेरे पास जितना था उतना आज भी मेरे पास सुरक्षित है लेकिन जैसे ही मेरा सदाचार खंडित हुआ मैं अपराधी बना दिया गया जो दंड योग्य है | सच है चरित्र ही सम्मान पाता है |

STORY OF THE DAY – मनुष्यता या पशुता

STORY OF THE DAY – मनुष्यता या पशुता

पाठशाला की छुट्टी हुई सब लड़के हँसते खेलते उछलते कूदते पाठशाला से निकले | पाठशाला के फाटक के सामने थोड़ी दूर सड़क पर एक आदमी लेटा था किसी ने भी उस और ध्यान नहीं दिया | सब अपनी धुन में मस्त चले जा रहे थे | एक छोटे बच्चे का ध्यान उस और गया तो वह दौड़कर उसके पास गया | देखा वह व्यक्ति बीमार था तो उस छोटे बच्चे ने जब उसे सहलाया तो उस व्यक्ति ने पानी माँगा | बच्चा दौड़कर पास के घर से पानी ले आया | व्यक्ति ने पानी पिया और फिर लेट गया | बच्चे ने पास के घर में जाकर लोटा लौटा दिया और अपने घर चला गया | उसके बाद खेलने चला गया |

शाम में जब वो लौटा तो उसने देखा एक सज्जन उसके पिता से बात कर रहे है कि एक बीमार व्यक्ति स्कूल के आगे मृत मिला तो इस पर बच्चे ने उनकी बातचीत सुनते हुए पापा से कहा कि मैंने उसे देखा था तो पूछने पर उसने सारी बात बताई | उस बच्चे के पापा ने उसे बताया कि किसी बीमार को ऐसे रस्ते में छोड़ना अच्छा नहीं होता उसे तुमने अस्पताल पहुँचाना चाहिए था तो बच्चे ने कहा- पर मैं अकेला था | पापा ने कहा पर तुम अपने किसी अध्यापक को या अन्य किसी बड़े व्यक्ति को बता सकते थे क्योंकि ऐसे में किसी की मदद करना बेहद जरुरी होता है हो सकता है कल को तुम अगर इसी स्थिति में होते तो और कोई तुम्हारी मदद नहीं करे तो तुम्हे अच्छा लगेगा क्या ??

पापा ने अपने बेटे को प्यार से समझाया की जरुरत के वक़्त किसी की भी मदद करना इंसानियत होती है जबकि उसे वंही लाचार छोड़ देना पशुता से भी बढकर है इस पर बच्चे ने सबक लिया और अपने पापा से भविष्य में ध्यान रखने और लोगो की मदद करने का वादा किया |