STORY OF THE DAY – दो थैले और मनुष्य

STORY OF THE DAY – दो थैले और मनुष्य

एक बार ब्रह्मा जी ने मनुष्य को बुलाकर पुछा कि तुम अपनी जिन्दगी में क्या चाहते हो तो मनुष्य ने जवाब दिया कि मैं उन्नति करना चाहता हूँ ,सुख शांति चाहता हूँ और चाहता हूँ कि लोग मेरी प्रशंशा करें | इस पर ब्रह्मा जी ने मनुष्य को दो थैले भेंट किये और उस से बोला कि इनमे से एक थैला वो है जिसमे तुम्हारे पडोसी की बुराइयाँ भरी उसे कभी अपनी पीठ पर लटका लो और उसे कभी मत खोलना और न ही खोलने देना | इसे हमेशा बंद रखना | दूसरे थैले में तुम्हारे दोष भरे है उसे सामने लटका लों और बार बार खोलकर देखा करों |

मनुष्य ने दोनों थैले उठा लिए लेकिन उसने एक बड़ी भूल कर दी उसने पडोसी की बुराइयों का थैला अपने सामने लटका लिया और खुद की बुराईयों का थैला अपनी पीठ पर बांध लिया और उसका मुह कसकर बंद कर दिया |

अब होता है ये है कि मनुष्य अपनी बुराईयों और कमियों को कभी नहीं देखता है जबकि पडोसी की बुराईयों और उसकी कमियों को वह बार बार देखता रहता है और उसे दूसरों को भी दिखाता रहता है | इसलिए उसने जो वरदान मांगे थे वो भी उलटे हो गये है वह उन्नति की जगह अवनति करने लगा उसे सुख की जगह दुःख और परेशानियाँ होने लगी | जबकि उसे करना ये था कि वो अपने पडोसी और परिचितों के दोष देखना बंद कर देता और अपनी खुद की कमियों पर अगर ध्यान देता तो शायद उसे खुशिया और उन्नति दोनों मिलती | अभी भी मनुष्य अपनी गलती को सुधार सकता है लेकिन बहुत कम लोगो को ये सुध है कि वो ये कर सकते है |

STORY OF THE DAY – रोटी में मुहर

STORY OF THE DAY – रोटी में मुहर

एक बार एक देश में अकाल पड़ा | लोग भूखों मरने लगे तो उस राज्य के एक धनी पुरुष ने जो कि बहुत ही दयावान था उसने सभी बच्चो के लिए एक एक रोटी देने की घोषणा कर दी | दूसरे दिन सवेरे बगीचे में सब बच्चे इकठे हुए तो सब लोग रोटी के लिए झगड़ा करने लगे क्योंकि रोटी छोटी बड़ी थी तो सब बच्चे एक दुसरे को धक्का देकर बड़ी रोटी पाने का प्रयास कर रहे थे | केवल एक छोटी सी लड़की एक और चुपचाप खड़ी थी उसे सबसे अंत में रोटी मिली जब केवल एक छोटी रोटी बची | उसने उसे बड़ी ख़ुशी से लिया और घर चली गयी |

दुसरे दिन भी यही हुआ जब रोटियां बांटी गयी तो आज भी उस लड़की को सबसे छोटी रोटी मिली और उसने इसे भी ख़ुशी से लिया और घर चली गयी जबकि जैसे ही घर जाकर उसने रोटी को तोडा उसमे से से सोने की मुहर निकली | उस लड़की की माता ने कहा ” मुहर उस धनी को वापिस दे आओ क्योंकि ये हमारी नहीं है |” लड़की भागी भागी उस धनी के घर गयी तो धनी ने उस से कहा तुम क्यों आई हो तो लड़की ने कहा कि मेरी रोटी में ये मुहर निकली है शायद आटे में गिर गयी होगी सो वापिस देने आई हूँ | आप अपनी मुहर ले लें |

धनी बहुत प्रसन्न हुआ क्योंकि उसे कोई बेटी नहीं थी इसलिए उसने उस लड़की को अपनी धर्मपुत्री बना लिया और उसकी माता को भी अपने यंहा कर्मचारी रख लिया | बड़ी होने पर वही लड़की उस धनी की उतराधिकारिणी बनी|

STORY OF THE DAY – असली सेवा और पुण्य्ध

STORY OF THE DAY – असली सेवा और पुण्य्ध

एक बार गुजरात की एक रियासत की राजमाता मिलन देवी ने भगवान् सोमनाथ का विधिवत अभिषेक किया |उन्होंने सोने का तुला दान कर उसे सोमनाथ जी को अर्पिता कर दिया | लेकिन यह करने के बाद उसका मन अहंकार से भर गया कि आज तक किसी ने भी बहुमूल्य सोने का दान नहीं किया | ऐसा कर चुकने के बाद वो आपस अपने महल में आ गयी | रात को जब वो सोने गयी तो भगवान सोमनाथ उसके सपने में आये और उस से बोला कि मेरे मंदिर में एक गरीब महिला आई है | उसके संचित पुण्य असीमित है उनमे से कुछ पुण्य तुम स्वर्ण मुद्राएँ देकर खरीद लो तुम्हारे परलोक में काम आएंगे |

नींद टूटते ही राजमाता बेचेन हो उठी और उसने अपने राजभवन के कर्मचारियों को आदेश दिया कि उस मंदिर से महिला को लेकर आओ |कर्मचारी मंदिर पहुंचे और उस महिला को पकड़कर ले आयें | महिला थर थर कांप रही थी क्योंकि उसे राजभवन में सैनिको द्वारा अचानक लाये जाने का प्रयोजन मालूम नहीं था |

राजमाता ने उस महिला से कहा कि ‘तुम अपने संचित पुण्य में से कुछ हमे देदो बदले में हम तुम्हे जितनी तुम चाहो तुम्हे स्वर्ण मुद्राएँ भेंट करेंगे |’ राजमाता की बात सुनकर गरीब महिला बोली ‘महारानी जी मुझ गरीब से भला पुण्य के कार्य कैसे हो सकते है मैं तो दर दर भटक कर भीख मांगती हूँ और कल जब मुझे भीख मिली तो मैंने सोचा सोमनाथ जी के दर्शन कर और उन्हें भी भोग लगा दू इस पर रस्ते में एक भिखारी मिला जो भूखा था तो आधा सत्तू मेने उसे दे दिया और बाकि सत्तू मेने सोमनाथ जी को भोग लगा दिया |” जब मैं भगवान् को ठीक से प्रसाद भी नहीं चढ़ा पायी तो भला पुण्य कैसे अर्जन होगा ?

गरीब महिला की बात सुनकर राजमाता का अहंकार नष्ट हो गया क्योंकि अब वो समझ चुकी थी कि निस्वार्थ समर्पण की भावना से प्रसन्न होकर भगवान ने उसे असीमित पुण्य दिया है | इसके बाद राजमाता समझ गयी कि दीन दुखियों की सेवा ही असली सेवा है | उसी में भगवान् प्रसन होते है |

STORY OF THE DAY – खुशी अगर बांटना चाहो तो तरीका भी मिल जाता है्र

STORY OF THE DAY – खुशी अगर बांटना चाहो तो तरीका भी मिल जाता है्र

एक आदमी ने दुकानदार से पूछा – केले और सेवफल क्या भाव लगाऐ हैं ? केले 20 रु.दर्जन और सेव 100 रु. किलो । उसी समय एक गरीब सी औरत दुकान में आयी और बोली मुझे एक किलो सेव और एक दर्जन केले चाहिये – क्या भाव है भैया ? दुकानदार: केले 5 रु दर्जन और सेब 25 रु किलो। औरत ने कहा जल्दी से दे दीजिये । दुकान में पहले से मौजूद ग्राहक ने खा जाने वाली निगाहों से घूरकर दुकानदार को देखा । इससे पहले कि वो कुछ कहता – दुकानदार ने ग्राहक को इशारा करते हुये थोड़ा सा इंतजार करने को कहा।

औरत खुशी खुशी खरीदारी करके दुकान से निकलते हुये बड़बड़ाई – हे भगवान तेरा लाख- लाख शुक्र है , मेरे बच्चे फलों को खाकर बहुत खुश होंगे । औरत के जाने के बाद दुकानदार ने पहले से मौजूद ग्राहक की तरफ देखते हुये कहा : ईश्वर गवाह है भाई साहब ! मैंने आपको कोई धोखा देने की कोशिश नहीं की यह विधवा महिला है जो चार अनाथ बच्चों की मां है । किसी से भी किसी तरह की मदद लेने को तैयार नहीं है। मैंने कई बार कोशिश की है और हर बार नाकामी मिली है।तब मुझे यही तरीकीब सूझी है कि जब कभी ये आए तो मै उसे कम से कम दाम लगाकर चीज़े दे दूँ। मैं यह चाहता हूँ कि उसका भरम बना रहे और उसे लगे कि वह किसी की मोहताज नहीं है। मैं इस तरह भगवान के बन्दों की पूजा कर लेता हूँ ।

थोड़ा रूक कर दुकानदार बोला : यह औरत हफ्ते में एक बार आती है। भगवान गवाह है जिस दिन यह आ जाती है उस दिन मेरी बिक्री बढ़ जाती है और उस दिन परमात्मा मुझपर मेहरबान होजाता है । ग्राहक की आंखों में आंसू आ गए, उसने आगे बढकर दुकानदार को गले लगा लिया और बिना किसी शिकायत के अपना सौदा खरीदकर खुशी खुशी चला गया ।

कहानी का मर्म :-

खुशी अगर बांटना चाहो तो तरीका भी मिल जाता है

STORY OF THE DAY – कुंए का विवाह और तेनालीराम

STORY OF THE DAY – कुंए का विवाह और तेनालीराम

एक बार राजा कृष्णदेव और तेनालीराम का किसी बात को लेकर विवाद हो गया | तेनालीराम रूठ कर चले गये | आठ दस दिन बीते तो राजा का मन उदास हो गया | राजा ने तुरंत तेनालीराम को खोजने के लिए अपने सेनिकों को भेजा | आसपास का पूरा क्षेत्र छान मारा पर तेनालीराम को कोई अता पता नहीं मिला | अचानक राजा को एक तरकीब सूझी उन्होंने आस पास के इलाकों में मुनादी करवाई | राजा अपने राजकीय कुँए का विवाह रचा रहे है | इसलिए आस पास के गाँव के सभी मुखिया अपने अपने कुओं को लेकर राजमहल पहुंचे अन्यथा सभी मुखियो को एक एक हजार स्वर्ण मुद्रा जुर्माने के तौर पर अदा करने होंगे |

तेनाली राम जिस गाँव में भेष बदल कर रहता था उस गाँव में भी ये मुनादी सुनाई दी | गाँव का मुखिया और अन्य गांवों के भी मुखिया बड़े परेशान थे सोच रहे थे अब किया क्या जाये क्योंकि कुओ को राजमहल केसे ले जाया जा सकता है | तेनालीराम जान गया था कि मुझे खोजने के लिए राजा ने ये तरकीब लड़ाई है | तेनालीराम ने गाँव के मुखिया को बुलाकर कहा आप चिंता न करें आपने मुझे इस गाँव में रहने के लिए जगह दी है इसलिए मैं आपकी मुश्किल का हल कर सकता हूँ आप सब गांवों के मुखिया को बुला लावें और मेरे बताये अनुसार करें |

तेनालीराम के साथ गाँव के मुखियाओं ने राजधानी की और प्रस्थान किया और राजधानी के बाहर एक जगह वो रुक गये और तेनालीराम के बताये अनुसार एक आदमी राजा के महल में सन्देश लेकर गया और बोला “महाराज आपके बताये अनुसार हमारे गाँव के कुँए राजधानी के बाहर डेरा डाले हुए है ” आप अपने राजकीय कुँए को उनकी अगवानी के लिए भेजें ताकि हमारे कुँए आपके दरबार में ससम्मान हाजिर हो सकें |

राजा को समझते देर नहीं लगी और उसने उस आदमी से पुछा की सच सच बताओ यह तरकीब तुम लोगो को किसने दी | आगन्तुक ने जवाब दिया थोड़े दिन पहले हमारे गाँव में एक परदेसी आकर रुका था उसी ने ये तरकीब दी है | तो राजा रथ पर बैठकर उसी समय उस स्थान पर पहुंचे और तेनालीराम को ससम्मान वापिस लेकर आये | और गाँव वालों को उपहार देकर विदा किया |

STORY OF THE DAY – थोडा सोचा होता तो

STORY OF THE DAY – थोडा सोचा होता तो

एक गरीब युवक अपनी गरीबी से परेशांन होकर किसी नदी के किनारे अपने जीवन को समाप्त करने गया | एक साधू वंहा था जिसने उसे ऐसा करने से रोक दिया | साधू ने युवक से परेशानी पूछी और सुनकर उस से कहा कि ” मेरे पास एक जादुई घडा है और तुम जो भी इस जादुई घड़े से मांगोगे ये पूरी कर देगा |” पर जिस दिन यह घडा फूट जायेगा जो कुछ भी इसने दिया है वो गायब हो जायेगा | मैं तुम्हे वो घडा दे सकता हूँ अगर तुम दो साल तक मेरी सेवा करते हो तो | और अगर पांच साल तक मेरी सेवा करते हो तो मैं तुम्हे वो जादुई विद्या भी सिखा सकता हूँ जिस से तुम वो घडा बना सकते हो | बोलो तुम क्या चाहते हो ?

इस पर उस युवक ने कहा ‘महाराज मैं तो दो साल तक आपकी सेवा करने को तेयार हूँ मुझे तो जल्दी से जल्दी बस ये घडा चाहिए ‘ | मैं इसे बहुत संभाल कर रखूंगा और इसे कभी फूटने ही नहीं दूंगा | इस तरह दो साल सेवा करने के बाद उस युवक ने वो जादुई घडा प्राप्त कर लिया और अपने घर पहुँच गया | युवक ने उस घड़े से अपनी हर इच्छा पूरी की महल बनाया नौकर चाकर बनाये और सब तरह से धन धान्य से संपन्न हो गया | इसके बाद उसके विलासिता का जीवन शुरू कर दिया और मदिरापान करना भी शुरू कर दिया एक दिन शराब पीकर वो घड़े को अपने सर पर रखकर नाच रहा था कि घडा फूट गया और जो कुछ उसने बनाया था सब गायब हो गया |

अब युवक सोचने लगा कि अगर मेने जल्दबाजी नहीं की होती और ठीक से सेवा करके अगर वो विद्या भी सीख ली होती तो मैं आज फिर से गरीब नहीं बनता अब तो सब कुछ खो गया |

Moral : कोई भी काम करने में जल्दबाजी नहीं की जानी चाहिए हमे सबसे पहले उस विषय में गहरा ज्ञान हासिल कर लेना चाहिए जो हमे अनुभवी बनाता है |

STORY OF THE DAY – सुखी आदमी का कुर्ता

STORY OF THE DAY – सुखी आदमी का कुर्ता

चांदपुर इलाके का राजा कुंवर सिंह बड़ा अमीर और धन धान्य से संपन्न था | उसे किसी भी चीज़ की कमी नहीं थी फिर भी उसका स्वस्थ्य अच्छा नहीं था | बीमारी की वजह से वो हमेशा परेशान रहते थे | कई वैद्यों ने उनका इलाज किया पर वो कुछ अधिक बेहतर नहीं कर पायें जिस से राजा की बीमारी को वो ठीक कर पाते | राजा की बीमारी बढती गयी और सारे नगर में ये बात फ़ैल गयी |

एक बूढ़े ने राजा को आकर कहा कि महाराज आप मुझे अपनी बीमारी का इलाज करने की अनुमति दीजिये मैं ये कर सकता हूँ | राजा की आज्ञा पाकर उस व्यक्ति ने राजा को कहा कि महाराज आप किसी सुखी आदमी का कुर्ता पहन लीजिये निश्चित ही आप ठीक हो जायेंगे | बूढ़े की बात सुनकर सभी दरबारी हंसने लगे लेकिन राजा ने मन में सोचा सभी तरह के इलाज करके देख लिए है एक और सही |

राजा के आदेश पर सभी मंत्रियो और सेनिको ने सुखी आदमी की खोज शुरू की लेकिन उन्हें कोई भी पूर्ण रूप से सुखी व्यक्ति नहीं मिला |सभी लोगो को किसी न किसी बात का दुःख था | अब राजा स्वयं ही किसी सुखी आदमी की खोज में निकल पड़ा | बहुत तलाश के बाद वो एक खेत में जा पहुंचे | जेठ की गर्मी में एक किसान अपना काम कर रहा था | राजा ने उस से पूछा “क्यों जी तुम सुखी हो ?” किसान की आंखे चमक उठी और मुस्कुराते हुए बोला कि ईश्वर की कृपा से कुछ भी दुःख नहीं है सब कुशल मंगल है और मैं बहुत सुखी हूँ |

राजा खुश हो गया और उसने कुर्ता मांगने वाली बात सोची तभी ध्यान दिया कि वो किसान केवल धोती ही पहने था और उसकी सारी देह पसीने से तर थी अब राजा को उस बूढ़े की बात का मतलब समझ आ गया उस दिन से राजा ने भोग विलास वाली दिनचर्या को छोड़ दिया आर परिश्रम करने के संकल्प लिया और कुछ ही दिनों बाद राजा स्वस्थ हो गया |

moral : अधिक भोग विलास या सुविधापूर्ण जिन्दगी इन्सान के लिए उतनी फायदे की नहीं होती |

STORY OF THE DAY – सूरत से अधिक सीरत

STORY OF THE DAY – सूरत से अधिक सीरत

दार्शनिक सुकरात दिखने में बहुत कुरूप थे और एक बार वो एक कमरे में बैठकर आईना देख रहे थे इतने में उनका एक शिष्य कमरे में आता है तो सुकरात को आईना देखते हुए बहुत अजीब सा महसूस करता है और मुस्कुराने लगता है लेकिन शर्म के मारे कुछ भी नहीं बोला लेकिन सुकरात उसकी मुस्कुराहट का राज समझ गये थे | थोड़ी देर बाद सुकरात ने शिष्य से बोला मुझे तुम्हारे मुस्कुराने की वजह पता है शायद तुम इसी लिए मुस्कुरा रहे हो कि मैं तो कुरूप हूँ मुझे आईना देखने की जरुरत क्या है तो इस पर शिष्य का मुंह शर्म से झुक गया |


सुकरात ने उस से कहा शायद तुम नहीं जानते ‘ मैं रोज इसलिए आईना देखता हूँ ताकि मुझे अपनी कुरूपता का आभास हमेशा रहे ” और मैं कोशिश करूँ कि मैं इतने अच्छे काम करूँ कि मेरे चेहरे की कुरूपता मेरे अच्छे कामों से ढक जाये |शिष्य को ये जवाब अच्छा लगा लेकिन उसने फिर अपनी शंका व्यक्त की कि ” गुरूजी इसका मतलब जो लोग सुंदर है उन्हें आईना नहीं देखना चाहिए ” इस पर सुकरात ने उसे जवाब दिया कि उन्हें भी हमेशा आईना देखते रहना चाहिए ताकि उन्हें ये हमेशा अहसास रहे कि जितने सुंदर वो दिखते है उसी के अनुरूप वो अच्छे काम भी करें | और कुछ भी ऐसा बुरा काम नहीं करें जो उनकी सुन्दरता को ढक ले | क्योंकि सूरत से अधिक सीरत की कुरूपता दुखदायी होती है |

STORY OF THE DAY

STORY OF THE DAY

एक जिज्ञासु था उसके मन में तरह तरह के सवाल उठते थे | सवालों के समाधान के लिए वो कभी उस संत के पास जाता तो कभी उस महात्मा के पास जाता | हालाँकि वो खुद भी अत्यंत ज्ञानी था किन्तु अपने प्रश्नों के उत्तर उसे दूसरों से प्राप्त करें में रूचि थी और धीरे धीरे यही उसकी प्रवृति भी बन गयी क्योंकि धीरे धीरे हमारी आदतें हमारा स्वाभाव बनती है | एक दिन एक बड़े महात्मा उसके शहर में आये तो उस जिज्ञासु ने उनके बारे में लोगो से पता किया तो उसे मालूम हुआ कि वो महात्मा बहुत ज्ञानी है |बस यही जानकर वह उन महात्मा के पास पंहुच गया और उनसे प्रार्थना की कि वो कुछ उपदेश सुनाएँ |

उस महात्मा ने उसे गौर से देखा तो उस से कहा कि मेरा उपदेश ये है कि “आज के बाद किसी से कोई उपदेश मत मांगना ” यह सुनकर वह व्यक्ति सोच में पड़ गया |तब महात्मा ने प्रश्न किया अच्छा एक बात बताओ कि ‘सच बोलना अच्छा है या बुरा ” तो उस व्यक्ति ने जवाब दिया ‘अच्छा’ | महात्मा ने फिर उस से पूछा कि ‘चोरी करना ठीक है या गलत ” तो उस जिज्ञासु व्यक्ति ने जवाब दिया कि “गलत ” | महात्मा ने पुन: प्रश्न किया कि बताओ “समय का सदुपयोग करना चाहिए या नहीं ” तो उस व्यक्ति ने जवाब दिया “हाँ करना चाहिए ” | इस प्रकार उस महात्मा ने कई प्रश्न उस से किये तो सभी का उसने सही जवाब दिया इस पर महात्मा ने उसे कहा कि तुम सब जानते हो तुम्हे सभी गुणों का ज्ञान है परन्तु अज्ञानता ये है तुम उन्हें असली जीवन में ग्रहण नहीं करते | जो ज्ञान तुम्हारे पास है उसे जीवन में अमल करो केवल गुणों का ज्ञान मात्र होने से काम नहीं चलता | उन पर अमल करो इसी में तुम्हारी भलाई है उपदेश सुनने में नहीं |

STORY OF THE DAY – खुदा की खातिर

STORY OF THE DAY – खुदा की खातिर

मक्का की बात है एक नाई किसी के बाल बना रहा था और उसी समय फ़कीर जुन्नैद वंहा आ पहुंचे और नाई से बोले कि ” खुदा की खातिर मेरी हज़ामत भी करदे |” नाई ने खुदा का नाम सुनते ही अपने गृहस्थ ग्राहक से कहा ” दोस्त में थोड़ी देर के लिए आपकी हज़ामत नहीं बना सकूंगा ।” खुदा की खातिर उस फ़कीर की खिदमत मुझे पहले करनी चाहिए । खुदा का काम सबसे पहले है और इसके बाद उसने फ़कीर की हज़ामत बड़े प्रेम से और श्रद्धा से बनायीं और नमस्कार करके उसे विदा कर दिया ।

कुछ रोज़ बीत गए तो एक दिन जुन्नैद को किसी ने पैसे भेंट किये तो वो उसे नाई को भेंट देने चले आये पर नाई ने पैसे लेने से इंकार कर दिया और कहा की “आपको शर्म नहीं आती ,आपने तो खुदा की खातिर हज़ामत बनाने को कहा था पेसो की खातिर नहीं ।” फिर तो जीवन भर जुन्नैद को वह बात याद रही